यह पन्ना अटूट शुद्ध सिद्ध बौद्ध परम्परा के बौद्धाभ्यासी और विद्वानों के दिमाग की उपज है जिसका उद्देश्य बुद्ध-धर्म और हिंदू धर्म के बीचके अंतर पर जागरूकता फैलाना है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि हिंदू धर्म- यह शब्द वैदिक धर्म परम्परा तथा दर्शन को दिखाने के लिए गत (पिछले ) समय में प्रचलित एक सामान्य और अनैतिहासिक शब्द है जिसे लोकप्रिय रूप से सनातन-धर्म या अंग्रेजी में ‘ब्राह्मनिज्म भी कहा जाता है। एक भ्रांति और गलत व्याख्या जो विशेष रूप से नेपाल और भारत में व्यापक है कि बौद्ध धर्म एक मौलिक आध्यात्मिक परम्परा का अलग समूह नहीं है। बल्कि इसे हिंदू धर्म की एक शाखा माना जाता है। यह भी माना जाता है कि बुद्ध ने उपनिषद् आदि वैदिक–हिन्दू ग्रंथों में पाए जाने वाले उपदेशों को एक अलग शैली में सिखाया या बुद्ध, विष्णु आदि जैसे कुछ देवताओं के अवतार हैं। कई कारणों ने ऐसे मिथकों और भ्रांतियों को पैदा करने में योगदान दिया है जो ऐतिहासिक और दार्शनिक रूप से पूर्णतया असत्य और निराधार दोनों हैं। इस वेबसाइट की चाहना उन भ्रांतियों को स्पष्ट करना और बौद्ध ग्रंथों (आगमों) में पाए जाने वाले बौद्ध पारंपरिक संभावनाओं को प्रस्तुत करना है जिसे जीवन्त शुद्ध सिद्ध बौद्ध परम्पराओं द्वारा समझा जाता है जिसके अनुसार बुद्ध ने एक ऐसा पृथकमार्ग सिखाया जो उनके समय में अनसुना था। बुद्ध ने स्वयं अपने प्रवचनों में इसे स्पष्ट किया है। हम इस पेजमार्फत शुद्ध सिद्ध प्रामाणिक बौद्ध परम्परा द्वारा सही दृष्टि और अभ्याससम्बन्धी सामग्री आपके सामने लाने के लिए पूर्ण प्रयास करेंगे।
इसके अतिरिक्त, हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि
१. ना तो हम एक राजनीतिक समूह हैं और न ही किसी पहचान बचाओ जैसे सामाजिक आंदोलन की हिमायत करते हैं। हमारा इरादा किसी समुदाय या बौद्ध सम्प्रदाय की नई पहचान बनाने का भी नहीं है। हम पारंपरिक बौद्ध धर्म के अभ्यासी और विद्वान हैं। हम आशा करते हैं कि इस वेबसाइट में प्रसारित की जाने वाली सामग्री, चर्चा, अन्तक्रिया बौद्ध धर्म के बारे में गलत धारणाओं को दूर करने और बौद्ध धर्मग्रंथों में पाए गए बौद्ध सिद्धांत और अभ्यास की मौलिकता को स्पष्ट करने में मदद करेंगे।
२. इस वेबसाइट के माध्यम से हमारा उद्देश्य वैदिक-हिंदुओं और बौद्धों दोनों के बीच में आपसी सौहार्द्रता (सम्मान) के आधार पर अपनी-अपनी आध्यात्मिक परंपराओं की विशिष्टता को समझने के लिए स्वस्थ बौद्धिक अंतःक्रियाओं को बढ़ावा देना है।
३. इस काम की प्रेरणा का स्रोत प्राचीन भारत की आध्यात्मिक परंपरा/संस्कृति है जिसने लोगों को अपने दार्शनिक विचारों पर खुलकर चर्चा करने के लिए प्रोत्साहित किया ताकि सत्य (तत्व-ज्ञान) प्रकट हो सके। इस परम्परा/संस्कृति का यह लक्ष्य है कि लोग भारतीय आध्यात्मिक परम्पराओं के बीच में रहने वाली भिन्नताओं को अच्छी तरह समझ सकें और उनके आधार पर अपने लिए सर्वश्रेष्ठ विधि का चयन कर सर्वोच्च पुरुषार्थ याने मोक्ष प्राप्त कर सकें।
४. हमारा उद्देश्य वैदिक हिंदू धर्म या उसके किसी देवीदेवता या किसी अन्य संप्रदाय या धर्म या गुरुओं की आलोचना करना नहीं है। हमारा मूल उद्देश्य बौद्ध अवधारणा को प्रस्तुत करना है और बुद्ध और उनके उपदेशों के बारे में भ्रम या गलतफहमी को स्पष्ट करना है